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#IndiaNeed4PublicRights

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हे देशवासियों,
वर्तमान व्यवस्था में किसी भी राजनैतिक दल या समाजसेवी संस्थाओं से यह कतई उम्मीद न करें की वे देश की 95% जनता के न्यायशील हिताधिकारों के पक्ष में कोई भी सकारात्मक न्यायशील कार्य कर रहे हैं ।
National Democratic Society (NDS) टीम का जिम्मेदार सदस्य होने के नाते मेरा यह निजी अनुभव है पूर्व में एक संस्था का पदाधिकारी रहते हुए पिछले कुछ वर्षों में देश की लगभग सभी राजनैतिक पार्टियों व समाजसेवी संस्थाओं के संपर्क में रहते हुए आज यह दावा करता हूँ कि उनका कार्य सिर्फ सामाजिक/आर्थिक/राजनैतिक समस्याओं के नाम पर सिर्फ व्यक्तिगत स्वार्थों की पूर्ति करना है न कि समस्याओं के समाधान पर स्थाई कार्य करना ।
वर्तमान में एक सरकारी सर्वे रिपोर्ट के अनुसार भारत में रजिस्टर्ड/नॉनरजिस्टर्ड लगभग 1568+ राजनैतिक पार्टियाँ33580+ समाजसेवी संस्थाओं द्वारा देश की जनता के मात्र 4 जनाधिकारों (बच्चों को शिक्षा-प्रशिक्षण / युवाओं को रोजगार के संसाधन / ग्रामीण स्तर पर समानुपातिक सार्वजनिक सेवाएँ-सुविधायें / सभी संवर्गों को बीमा-बैंकिंग-स्वास्थ्य जैसा संरक्षण) पर समुचित व सकारात्मक कार्य किया जाता तो आज भारतीय सामाजिक/आर्थिक/राजनैतिक जीवन स्तर की तस्वीर ही कुछ अलग होती ।
पूर्व में एक संस्था का पदाधिकारी रहते हुए इस जनहित के मुद्दे को लेकर कई दिग्गज राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों और समाजसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों से व्यक्तिगत संपर्क किया और इस “न्यायशील राष्ट्र स्थापना अभियान” के न्यायशील स्थाई समाधान को उनसे शेयर किया व समझाया तो उन सभी के अप्रत्याशित व चौंकाने वाले बयाँ सामने आये..
बयाँन कुछ इसप्रकार हैं-:
“यदि आपके इस मुद्दे को संवैधानिक रूप से लागू किया गया तो वर्तमान राजनीतिक दलों के लोगों की राजनीति ही खतरे में पड़ जायेगी ।”
ठीक इसी प्रकार समाजसेवी संस्थाओं के लोगों का भी बयाँन है-: “यदि इस प्रस्ताव पर काम किया गया तो यह तो अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारने जैसा ही होगा, हमारी बरसों की मेहनत पर पानी फिर जाएगा, और हमारे मुद्दे तो सब ख़त्म ही हो जायेंगे ।”
हे देशवासियों,
अब आप स्वयं सोंचें की वर्तमान राजनैतिक दलों व समाजसेवी संस्थाओं की इस स्वार्थी मानसिकता वाली सोँच पर आपके हिताधिकारों को कितना महत्त्व दिया जा रहा है और आपके जीवन के साथ नारकीय खेल के पीछे क्या साजिश रची जा रही हैं ।
वास्तविकता यह है की ये राजनैतिक दल व समाजसेवी संस्थायें चाहती ही नही की जनता की समस्याओं का स्थाई समाधान हो, यदि ऐसा हुवा तो इनकी अपनी दुकानों का धंधा बंद हो सकता है ।
अब आप सभी को इनकी धूर्तता से सावधान होकर अपने असली हिताधिकारों के प्रति जागरूक होने का समय आ चुका है अतः जागरूक बनो ।
जागरूकता ही क्रांति है ।
जब आप सही और गलत में सैद्धांतिक फर्क समझने लगेंगे तब स्वयं अपने हिताधिकार भी प्रतिष्ठित कर लेंगे ।
“नेशनल डेमोक्रेटिक सोसायटी” (एन.डी.एस) द्वारा #IndiaNeed4PublicRights नाम से एक विश्वव्यापी न्यायशील जनाधिकार जन-आन्दोलन का आग़ाज आगामी 19th मार्च 2017 को दिल्ली स्थित जंतर-मंतर में होने जा रहा है आप सभी देशवासियों से उम्मीद है अपने कम से कम 11 न्यायप्रेमी मित्रों के साथ इस जन-आन्दोलन में अवश्य सहभागिता निभाओगे…!!
नोट:- जनहित में यह मैसेज अपने मित्रों तक अधिक से अधिक संख्या में पहुंचायें…!!
???
रामनरेश गुप्ता
नेशनल डेमोक्रेटिक सोसाइटी (एन.डी.एस)
दिल्ली +91-8750382474 

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