Home Health दो मांओं के अंडों और एक पिता स्पर्म से मिलकर पैदा हुआ...

दो मांओं के अंडों और एक पिता स्पर्म से मिलकर पैदा हुआ दुनिया का अनोखा बच्चा, अब उठ रहे सवाल

1372
0
SHARE
  • ग्रीस की एक 32 वर्षीय महिला लगातार 4 बार मां बनने की कोशिश के बाद भी असफल रही
  • एक मां के एग, पिता का स्पर्म और एक दूसरी डोनर मां के एग से विकसित किया गया बच्चा
  • बच्चे का जन्म मंगलवार को हुआ और वजन  2.9 किलो है

 महिला में बांझपन की समस्या दूर करने के लिए ग्रीस और स्पेन के डॉक्टरों ने तीन इंसानों के अंडाणु (एक) और स्पर्म मिलाकर एक बच्चा पैदा किया है। बच्चे का जन्म मंगलवार को हुआ है। इसका वजन 2.9 किलो है, मां-बेटे दोनों की सेहत ठीक है। डॉक्टरों का कहना है दुनियाभर में इंफर्टाइल कपल भी अब मां-बाप बन सकेंगे। वहीं लंदन के कुछ एक्सपर्ट बच्चे को विकसित करने इस तकनीक पर सवाल उठा रहे हैं।

बच्चे में मां की दुर्लभ बीमारी होने का खतरा हुआ कम

डॉक्टरों के मुताबिक, इसे आईवीएफ तकनीक से विकसित किया गया है। बच्चे को विकसित करने के लिए मां के एग, पिता का स्पर्म और एक दूसरी डोनर मां के एग को लिया गया है। यह तरीका ऐसे लोगों के लिए विकसित किया गया है जिनके परिवार में कोई जानलेवा माइट्रोकॉन्ड्रियल बीमारी से ग्रसित है। जिसके कारण इस बीमारी का मां से बच्चे में होने का खतरा रहता है।

मामला ग्रीस की रहने वाली 32 साल महिला का है जिसने लगातार 4 बार आईवीएफ तकनीक से मां बनने की कोशिश की लेकिन असफल रही। अब वह मां बन चुकी है और उसके बच्चे में डोनर की माइटोकॉन्ड्रिया के साथ अपना डीएनए भी है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक आईवीएफ के ट्रेंड को बढ़ाने का काम करेगी। उनके मुताबिक, सफल प्रेग्नेंसी में माइटोक्रॉन्ड्रिया का रोल हो सकता है लेकिन इस दावे का अब तक प्रमाणिक टेस्ट नहीं किया गया है।

माइटोकॉन्ड्रिया में बीमारी के कारण बदली प्रक्रिया

इंसान का शरीर छोटी-छोटी कोशिकाओं से मिलकर बना होता है। कोशिकाओं में कई माइटोकॉन्ड्रिया पाई जाती हैं जो खाद्य पदार्थों से एनर्जी बनाने का काम करती हैं। इसे शरीर का ट्रांसफॉर्मर भी कहते हैं। महिला इसी माइटोकॉन्ड्रिया से जुड़ी आनुवांशिक बीमारी से जूझ रही थी। ऐसे में डॉक्टरों ने मां के डीएनए और डोनर मां की माइटोक्रॉन्ड्रिया को मिलाकर बच्चा विकसित किया। इसलिए बच्चे में आनुवांशिक रोग का खतरा न के बराबर हो गया।

8 भ्रूण तैयार और 24 महिलाओं पर ट्रायल जारी

एथेंस के इंस्टीट्यूट ऑफ लाइफ के प्रेसीडेंट डॉ. पेनागोइटिस के मुताबिक, अब ऐसी औरतें  भी मां बन सकती हैं जो कई बार आईवीएफ प्रक्रिया में असफल हो चुकी हैं या माइटोकाॅन्ड्रियल जेनेटिक डिजीज से जूझ रही हैं। ग्रीस की एक टीम वर्तमान में स्पेन के एक सेंटर एंब्रायोटूल्स के साथ मिलकर काम कर रही है। यह सेंटर 24 दूसरी औरतों को लेकर ट्रायल कर रहा है और  8 भ्रूण तैयार किए जा चुके हैं जिसे जल्द ही प्रत्यारोपित किया जाएगा।

लंदन में 2018 में पहली विकसित हुई थी यह तकनीक

फरवरी, 2018 में लंदन में पहली बार तीन इंसानों से विकसित होने वाले बच्चे की तकनीक खोजी गई थी। जिसकी अनुमति भी मिली थी। फर्टिलिटी रेग्युलेटर ने ऐसे दो प्रयासों को अनुमति दी थी जिनकी फैमिली माइटोकाॅन्ड्रियल बीमारी से जूझ रही  थी। हालांकि इस मामले पर भी कुछ डॉक्टरों ने आपत्ति जताई थी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here